हे!बादल , हे! जलद
हो लिए प्रसन्नता या उन्माद
ये झर झर झरते मोती
हैं प्रेमालाप या वियोग नयनजल
कभी चमकना,कभी गर्जना
हो हर्षित या क्रोधित
कही हो आशा कही हो प्रलय
हो अनुरागी या द्वेषी
हो लिए स्थिरता या मन में चंचलता
ये कभी बरसना कभी ठहरना
हैं पीड़ा या क्रीड़ा तुम्हारी
हे!बादल , हे! जलद– हर्षिता
जलद
“जलद” के लिए प्रतिक्रिया 9
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शुक्रिया 😊
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