वक्त

हमारी पहली मुलाक़ात , पहली बात
सब कितना ख़ास था न
तुम्हारा हल्के नीले रंग का कुर्ता
तुम्हारी मुस्कान
थोड़ी घबराहट
थोड़ी बेचैनी
लग रहा था कुछ पल के लिए
वक्त मानो रुक सा गया हो
वो ठहर कर देखना चाहता हो
तुम्हे और मुझे एक संग
या शायद वो हँस रहा था देखकर
तुम्हें और मुझे एक संग
संज्ञान हो जैसे उसे भविष्य का
सब बदल गया
वक्त भी , तुम भी और मैं भी
कुछ अनकही बातों , अनसुलझे झगड़ों ने
गला घोट दिया मासूमियत और प्यार का
अब बचा है केवल दर्द
और उससे बाहर निकलने का प्रयास
-हर्षिता

6 responses to “वक्त”

  1. Your writing is very well written and wonderful.

    Beautiful & heartfelt 🤩🤩🥳🥳

    Liked by 2 लोग

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