
इक्कीसवीं सदी -विज्ञान और तरक्की का युग। विज्ञान की देन है कि दूर होते हुए भी हम एक दूसरे से बात कर सकते हैं। घर बैठे हजारों काम आप ऑनलाइन कर सकते जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी । सभी आधुनिकता के रंग में रंग गए हैं। सभी की जीवन शैली अपडेट हो गई हैं। बस अपडेट होना रह गया तो लोगों की मानसिकता , सामाजिक कुरीतियां , पुराने ख्याल। मैं यह बिल्कुल नहीं कहती की पुराने सभी रीति रिवाज गलत हैं या पुराने लोगों को जीवन जीने का तरीका नहीं पता हैं। पुरानी जीवन शैली और आधुनिक जीवन शैली का कोई मुकाबला नहीं हैं। हमें पुराने लोगों ने , पुरानी पीढ़ियों ने जितना कुछ दिया उसका कर्ज हम कभी नहीं चूका सकते हैं।
पर जरूरत है की हम पुराने संस्कारो को अपने जीवन में इस प्रकार डाले की उसकी सारी अच्छाइयां अपने अंदर समेट ले और सारी बुराइयां कहीं इतनी दूर फेक दे की वो कभी वापस ना आ सके।
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