• Chaos

    Whenever there is chaos, we try to run from it, to escape it. But the truth is, we can never truly escape our feelings or the chaos within us. The more we try to avoid it, the more entangled we become, and the more we suffer. It’s harsh, but perhaps the only way forward is… Read more

  • कमरा

    कई बार कमरा बन जाता है पूरा संसार,कभी सुकून देता है,तो कभी लगता हैइसकी दीवारें सिमट जाएँगी।निगल लेंगी मेरे अस्तित्व को,एक अजीब सा डर ।इसकी छत में एक गहरा सन्नाटा है।सोचती हूँक्या ये दीवारें मुझे निगल लेंगी ?या फिरहौसला देंगी आसमान देखने का?– हर्षिता Read more

  • December

    December always brings a strange stillness with it. It’s the month where we look back, feel deeply, and quietly prepare ourselves for what’s next. Lately, I’ve been expressing these emotions not just through words here, but also through short visual quotes and reflections on my YouTube channel. If you enjoy gentle reminders, healing thoughts, and… Read more

  • अधूरा

    हर बार  अंत का अच्छा होना ज़रूरी नहीं, चीजें होती हैं ख़त्म बुरे मोड़ पर भी।हर बार बातों का पूरा होना ज़रूरी नहीं, बातें रह जाती है दिल में अधूरी भी।हर बार मिल जाना जवाब सभी प्रश्नों का ज़रूरी नहीं,नहीं मिलते हैं जवाब कुछ सवालों के। हां, ज़रूरी नहीं कि हर बार अंत अच्छा हो,जैसे… Read more

  • दुविधा केवल अन्याय करना नहीं है, दुविधा है अन्याय करने के बाद भी मन का शांत होना हर्षिता सिंह Read more

  • इंतज़ार

    मैं बैठी अकेली इंतज़ार करती ,उस पेड़ के नीचे ,तकती रहती वो रास्ता ,जहा से शुरू हुआ था ,वो सब जो आज नहीं हैं ।मैं इंतज़ार करती ,तुम्हारे आने का नहीं ,सपनों का ,जो मैं खो चुकी थी ।मैं इंतज़ार करती ,प्रेरणा का ,जो मैं खो चुकी थी ।मैं बैठी अकेली इंतज़ार करती ,उस पेड़… Read more

  • स्वीकृति

    घर के अंदर, घर से बाहर और आइने में,वो छिपाती,सफ़ेद बाल।या छिपाती अपनी निर्बलता?स्वयं को स्वीकार न कर पाने की हर्षिता Read more

  • वक्त

    हमारी पहली मुलाक़ात , पहली बातसब कितना ख़ास था न तुम्हारा हल्के नीले रंग का कुर्तातुम्हारी मुस्कानथोड़ी घबराहट थोड़ी बेचैनीलग रहा था कुछ पल के लिएवक्त मानो रुक सा गया होवो ठहर कर देखना चाहता हो तुम्हे और मुझे एक संगया शायद वो हँस रहा था देखकर तुम्हें और मुझे एक संग संज्ञान हो जैसे… Read more

  • याद

    आज फिर तुझे याद कियाखुली आंखों से सपनो का आगाज़ कियानींद का सौदा रात के साथ कियाहर क्षण को स्वपनों का तेरे उपहार दियाआज फिर तुझे याद कियाअतीत को न जाने कितनी बार यथार्थ कियावर्तमान से भूत में जाने का कई बार प्रयास कियासुखद पलों को सज्जित अपने वर्तमान का हार दियाआह! स्मृति मात्र को… Read more

  • जलद

    हे!बादल , हे! जलदहो लिए प्रसन्नता या उन्मादये झर झर झरते मोतीहैं प्रेमालाप या वियोग नयनजलकभी चमकना,कभी गर्जनाहो हर्षित या क्रोधितकही हो आशा कही हो प्रलयहो अनुरागी या द्वेषीहो लिए स्थिरता या मन में चंचलताये कभी बरसना कभी ठहरनाहैं पीड़ा या क्रीड़ा तुम्हारीहे!बादल , हे! जलद – हर्षिता Read more

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