हर बार अंत का अच्छा होना ज़रूरी नहीं,
चीजें होती हैं ख़त्म बुरे मोड़ पर भी।
हर बार बातों का पूरा होना ज़रूरी नहीं,
बातें रह जाती है दिल में अधूरी भी।
हर बार मिल जाना जवाब सभी प्रश्नों का ज़रूरी नहीं,
नहीं मिलते हैं जवाब कुछ सवालों के।
हां, ज़रूरी नहीं कि हर बार अंत अच्छा हो,
जैसे नहीं हुआ तुम्हारे मेरे रिश्ते का।
हां,ज़रूरी नहीं कि बाते पूरी हो,
जैसे रह गई है कितनी अनकही बाते हमारे बीच।
हां, ज़रूरी नहीं मिल जाए जवाब सभी सवालों के,
जैसे रह गए है कितने सवाल तुम्हारे और मेरे मन में।
अधूरा
– हर्षिता
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