उठो , जागो, चलो
लक्ष्य की ओर बढ़ते रहो
बिना रुके , बिना थके
अथक प्रयास करते रहो
न मिलें मंज़िल जब तक
बस चलते रहो , चलते रहो,
बेड़ियों को तोड़कर ,
बाधाओं को भूल कर बढ़ते रहो
हवाओं का रुख मोड़कर
पहाड़ों को तोड़कर
अपना मकसद गढ़ते रहो
उठो,जागो ,चलो
अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहो
न मिलें मंजिल जब तक
बस चलते रहो चलते रहो
– हर्षिता
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